Wednesday, October 20, 2021
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Lesson – 8 E-Mail, Social Networking & e-Governance Services (ई-मेल, सोशल नेटवर्किंग और ई-गवर्नेन्स सर्विसेज़)

Introduction (प्रस्तावना)

दैनिक जीवन में संचार एक आवश्यक कारक है। कार्यों को पूरा करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को दूसरे के साथ संवाद करना होता है। हम कह सकते हैं कि संचार एक जगह से दूसरी जगह सूचना भेजने और प्राप्त करने का तरीका है। सफलता प्राप्त करने के लिए, संचार अधिक प्रभावी होना चाहिए जो एक दो-तरफा प्रक्रिया है।

सच्चे सहयोग के लिए प्रभावी संचार की आवश्यकता होती है। संचार इंटरनेट का सबसे लोकप्रिय उपयोग है। इंटरनेट के माध्यम से आप दुनिया भर में अपने दोस्तों परिवार के सदस्यों, टीम के सदस्यों आदि जैसे अन्य व्यक्तियों के साथ संवाद और सहयोग कर सकते हैं।

इंटरनेट संचार का अर्थ सूचनाओं और विचारों को इंटरनेट के माध्यम से साझा करना है। इसका सबसे अधिक लाभ यह है कि अपने घर में बैठे-बैठे ही आप किसी से भी, कहीं भी और कभी भी कनेक्ट हो सकते हैं।

Objectives (उद्देश्य)

इस अध्याय में निम्नलिखित के बारे में पढे़गे

  • ई-मेल की मूल बातें
  • ई-मेल का प्रयोग
  • ई-मेल क्लाइंट खोलना
  • ई-मेल बनाना और भेजना
  • ई-गवर्नेन्स सर्विसेज़
  • सोशल नेटवर्किंग और उसके प्रकार
  • उमंग एप
  • डिजिटल लाॅकर

What is an E-mail? (ई-मेल क्या है ?)

इलेक्ट्राॅनिक मेल या ई-मेल का अर्थ है संदेशों का इलेक्ट्राॅनिक माध्यम से आदान-प्रदान। दूसरे शब्दों मे,

किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को संदेश भेजने या लेने के लिए ई-मेल एक सस्ता, भरोसेमंद और गतिवान साधन है।

ई-मेल प्राप्त करने के लिए एक ई-मेल एकाउन्ट और ई-मेल एड्रेस की आवश्यकता होती है। दूसरे व्यक्ति को ई-मेल भेजने के लिए भी हमें उनके ई-मेल एड्रेस की आवश्यकता होती है। ई-मेल को सही व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए ई-मेल एड्रेस को सही तरीके से लिखा जाना चाहिए।

How E-mail Works? (ई-मेल कैसे काम करता है ?)

किसी ई-मेल को भेजने के लिए निम्न चरणों का अनुसरण करें-

  • सबसे पहले अपने सिस्टम को इंटरनेट से कनेक्ट करें। ई-मेल प्रोग्राम स्टार्ट करें, जैसे -जीमेल, याहू, रेडिफ, हाॅटमेल, इत्यादि।
  • अपने एकांउट को लॉग इन करके Compose बटन पर क्लिक करें। ‘न्यू मैसेज’ नामक एक विंडो दिखायी देती है।
  • ‘To’ बाॅक्स में वह पता लिखें जिस पर आपको मैसेज भेजना हो। इसी विंडो में आप एक से ज्यादा ई-मेल एड्रेस लिख सकते हैं।
  • दिये गए उचित स्थान पर मेल का Subject लिखें।
  • दिये गए टेक्स्ट एरिया में अपना मैसेज टाइप करें।
  • अन्त में, मैसेज भेजने के लिए Send बटन पर क्लिक करें।

E-mail addressing (ई-मेल एड्रेसिंग)

ई-मेल एड्रेस एक मानक रूप में लिखे जाते हैं। यह दो भागों में विभाजित होते हैं-

  • डोमेन नेम, जो कि ई-मेल सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा दिये जाते हैं।
  • यूजर नेम

यूजर नेम और डोमेन नेम को एक विशेष संकेत @ चिहृ द्वारा अलग किया जाता है जो ‘at’ के रूप में पढ़ा जाता है।

ई-मेल प्रदाता वह वेबसाइट है जो ई-मेल को होस्ट करता है। अर्थात् जिसके सर्वर पर ई-मेल स्टोर होती है। ई-मेल प्रदाता वह कम्पनी हो सकती है जिसके द्वारा हम इन्टरनेट से जुड़ते हैं। उदाहरणतः बीएसएनएल, एमटीएनएल या फिर कोई नि:शुल्क वेब आधारित ई-मेल सर्विस हो सकती है। जैसे- याहू, जी-मेल, आउटलुक एक्सप्रेस (पूर्व में हाॅटमेल) आदि। ई-मेल सर्विस किसी कम्पनी, स्कूल या किसी संगठन द्वारा भी होस्ट की जा सकती है। ई-मेल एड्रेस केस-सेंसिटिव नहीं होते हैं। इसमें कहीं भी स्पेस नहीं देना चाहिए।

वेब डोमेन का प्रत्यय निम्न हो सकता है-

–  .com (वाणिज्यि संगठन);

– .gov (सरकारी संस्था);

– .edu (शैक्षणिक शाखाएँ);

– .org (गैर लाभकारी संगठन);

ई-मेल सर्विस प्रदाता के पास एकाउन्ट बनाने पर एक ई-मेल एड्रेस प्राप्त होता है। एक एकाउन्ट में यूजरनेम, ई-मेल एकाउन्ट प्रदाता, पासवर्ड और ई-मेल की जानकारी होती है।

जबकि किसी विशेष ई-मेल एड्रेस पर ई-मेल भेजी जाती है तो वह ई-मेल होस्ट के सर्वर पर स्टोर कर दी जाती है। अब जब प्राप्तकर्ता अपने ई-मेल एकाउन्ट पर लाॅग इन करता है तो सभी नए संदेश ई-मेल क्लाइन्ट पर डाउनलोड हो जाते हैं।

Structure of E-mail (ई-मेल की संरचना)

ई-मेल संदेश में विभिन्न घटक शामिल हैं- मेल हैडर, अभिवादन, टेक्स्ट और हस्ताक्षर। यह घटक निम्नलिखित आरेख में वर्णित हैं-

  • E-mail Header (ई-मेल हैडर)

ई-मेल संदेश की पहली पाँच पंक्तियों को ई-मेल हैडर कहा जाता है। हैडर भाग में निम्नलिखित फील्ड शामिल हैं-

  • From – यह फील्ड प्रेषक के एड्रेस को दर्शाता है जिस दिन ई-मेल भेजी गयी थी।
  • Date – यह उस दिनांक को दर्शाता है जिस दिन ई-मेल भेजी गयी थी।
  • To – यह फील्ड प्राप्तकर्ता के एड्रेस को दर्शाता है अर्थात् जिसको ये मेल भेजी गयी है।
  • Subject – ई-मेल का उद्देश्य इस फील्ड द्वारा दर्शाया जाता है। यह सटीक और बिंदुवत होना चाहिए।
  • CC- CC इसका अभिप्राय कार्बन काॅपी से है। इसमें उस प्राप्तकर्ता के एड्रेस शामिल होते हैं जिनको सिर्फ उस मेल की सूचना देनी होती है।
  • BCC- BCC इसका अर्थ ब्लाइंड कार्बन काॅपी होता है। इसका उपयोग तब किया जाता है जब हम प्राप्तकर्ताओ में से एक या एक से अधिक को यह नहीं बताना चाहते कि संदेश में किसी और को जोड़ा गया था।
  • Greeting (ग्रीटिंग)

अभिवादन वास्तविक संदेश का आरम्भ भाग है। उदाहरण के लिए, हाय सर या हाय दोस्तो आदि।

  • Text (टेक्स्ट)

यह संदेश की वास्तविक सामग्री का प्रतिनिधित्व करता है।

  • Signature (सिग्नेचर)

यह ई-मेल संदेश का अंतिम भाग है। इसमें प्रेषक का नाम, पता और संपर्क नंबर शामिल होता है।

Using E-mail (ई-मेल कर प्रयोग)

ई-मेल का प्रयोग करने के लिए एक ई-मेल एकाउंट होना आवश्यक है। इसके लिए किसी भी निःशुल्क ई-मेल सर्विस प्रदाता के साथ एकाउन्ट बनाया जा सकता है। ब्राउजर के एड्रेस बार में ई-मेल होस्टिंग साइट का एड्रेस डालें और एकाउन्ट बनायें।

Opening an E-mail Account (ई-मेल एकाउन्ट बनाना)

  • With Yahoo! Mail (याहू! मेल पर)

होम पेज पर क्रिएट एकाउन्ट पर क्लिक करें और सभी आवश्यक प्रविष्टियों को भरें।

  • With Outloock.com (आउटलुक.काॅम पर)

होम पेज पर साइन अप क्लिक करें और सभी आवश्यक प्रविष्टियों को भरें।

  • With Gmail (जीमेल पर)

होम पेज पर क्रिएट ऑन एकाउन्ट पर क्लिक करें और सभी आवश्यक प्रविष्टियों को भरें।

  • क्रिएट एकाउन्ट पर क्लिक करने पर निम्न साइन-अप फ़ोर्म प्रदर्शित होगा। आवश्यक जानकारी देकर निर्देशों का पालन करें।
  • अब अपना फोन नम्बर भरकर अपने एकाउन्ट की पुष्टि करें। गूगल सुरक्षा के द्रष्टिगत दो-चरणीय सत्यापन का प्रयोग करता है।
  • गूगल से एक टेक्स्ट संदेश प्राप्त होगा जिसमें एक सत्यापन कोड होगा। कोड भरकर एकाउन्ट का सत्यापन पूर्ण करें।
  • अब अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे निक नेम और जन्मदिन भरें।
  • गूगल की सेवा की शर्तों और गोपनियता नीति की समीक्षा करें फिर आई एग्री पर क्लिक करें।
  • आपका एकाउन्ट बन गया है।
  • पहली बार साइन इन ही होते है।

Mailbox: Inbox Outbox (मेलबाॅक्स: इनबाॅक्स और आउटबाॅक्स)

एक बार एकांउट बनाने के बाद आपको ई-मेल प्राप्त होने लगेंगे। जिसमें सबसे पहली ई-मेल सेवा प्रदानदाता की होती है। आपके एकांउट की सभी ई-मेल एक मेल बाॅक्स में स्टोर हो जाती हैं। आपके द्वारा प्राप्त ई-मेेल का इन बाॅक्स में संग्रहित किया जाता है, जबकि, एक आउटबाॅक्स वह जगह है जहाँ आउटगोंइग ई-मेल अस्थायी रूप से संग्रहित होते है। एक संदेश आउटबाॅक्स में तब तक संग्रहित किया जाता है। जब तक कि इसे सफलतापूर्वक प्राप्तकर्ता को नहीं भेजा जाता है। एक बार ई-मेल भेजे जाने के बाद, इसे आउटबाॅक्स से स्थानांतरित कर दिया जाता है और सेंट आइटम्स में संग्रहित किया जाता है। आपके द्वारा हटाए गए ई-मेल को डिलेटेड आइटम में संग्रहित किया जाता है जिसे स्पैम भी कहा जाता है।

  • Inbox (इनबाॅक्स)

इनबाॅक्स ई-मेल एकाउंट में सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है जहाँ सभी प्राप्त ईमेल देखे एवं एक्सेस किये जा सकते हैं। यह सभी प्राप्त ईमेल को एक टेबल में दिनांक के हिसाब से व्यवस्थित करके रखता है, जिससे आसानी से किसी ईमेल को खोजा जा सके।

  • Outbox (आउटबाॅक्स)

आउटबाॅक्स वह जगह है जहाँ भेजे गए सभी डेटा को तब तक स्टोर किया जाता है जब तक कि यह पूरी तरह से भेजा नहीं जाता है। सेंट मेल नामक एक खंड भी है, जिसमें पूरी तरह से वितरित ईमेल की सूची है। अंतर केवल आउटबाॅक्स का है जो भेजे गए ईमेल को डिलीवर नहीं करता है और पेंडिंग रखता है, जबकि सेंट बाॅक्स पूरी तरह से भेजे गए ईमेल की सूची रखता है।

यह वो जगह है जहाँ संदेश बनाए गए है लेकिन भेजे नहीं गए है और यहाँ तक कि भेजे जाने कि लिए कतारबद्ध नहीं हैं। दूसरे शब्दो में हम जो भी मैसेज कम्पोज करते है और उसे सेव करतें है, वह संग्रहित होता है।

  • Junk (जंक)

जंक फोल्डर ईमेल एकाउंट का वह हिस्सा होता है जो कोई फेक या स्पैम ईमेल जिसमें वायरस जुड़ा हो, मेलवेयर, स्पाईवेयर हो या ऐसा कुछ जो आपका कीमती डाटा को चुरा या हैक करता हो, ऐसे ईमेल इस फोल्डर में स्टोर होते हैं। ईमेल क्लाइंट एप्लीकेशन इसे स्वतः पहचान कर जंक फोल्डर में भेजा है ताकि आप इन चीजों से बच सकें।

  • Sent Items (सेंट आइटम्स)

यह वो स्थान है जहाँ डिलीवर किए गए सभी ईमेल सूचीबद्ध होते हैं और उनकी समीक्षा की जा सकती है। आउटबाॅक्स और सेंट बाॅक्स या आइटम के बीच अंतर पर ऊपर चर्चा की गई है।

  • Deleted Items (डिलीट आइटम्स)

यह ईमेल एकाउंट का वो हिस्सा है जिसमें यूजर द्वारा डिलीट किये गये ईमेल स्टोर होते हैं, जिसे आप आगे चलकर अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

Creating and sending a new E-mail (ई-मेल लिखना और भेजना)

मेल लिखने के लिए कम्पोज विंडो का प्रयोग होता है। इसके लिए बाएँ मेन्यू पेन में कम्पोज मेल पर क्लिक करें।

अब निम्न क्रमानुसार करें:

  • टू: फील्ड में एक या अधिक प्राप्तकर्ताओं के नाम अल्पविराम (,) से अलग-अलग करके लिखें। प्राप्तकर्ताओं के नाम काॅन्टैक्ट सूची में से भी चुने जा सकते हैं।
  • सब्जैक्ट: फील्ड में अपने संदेश का विषय प्रविष्ट करें।
  • बाॅडी: फील्ड में संदेश प्रविष्ट करें। विंडो के नीचे दिए गए टेक्स्ट फॉरमेटिंग को फॉर्मेट किया जा सकता है।
  • मेल भेजने के लिए सैंड पर क्लिक करें।

Replying to an E-mail message (ई-मेल संदेश का उत्तर देना)

किसी भी मेल का उत्तर देने के लिए उसको पढ़ने के लिए खोलें और रिप्लाई पर क्लिक् करें। अगर सीसी और बीसीसी प्राप्तकर्ताओं को भी जवाब देने के लिए रिप्लाई टू ऑल पर क्लिक करें। कम्पोज मेल विंडो खुल जाएगी। अब मेल का रिप्लाई टाइप करें।

Forwarding an E-mail message (ई-मेल संदेश को आगे भेजना)

किसी ई-मेल को फाॅर्वर्ड करने के लिए उसे पढ़ने के लिए खोलें और फाॅर्वर्ड पर क्लिक करें। प्राप्तकर्ताओं का एड्रेस टू सीसी, बीसीसी में प्रविष्ट करें। मूल संदेश में अपना संदेश जोड़कर सैंड पर क्लिक करें।

Searching e-mails (ई-मेल खोजना)

जैसे-जैसे इनबाॅक्स में ई-मेल की संख्या बढ़ती है इनका प्रबंधन आवश्यक हो जाता है। हम इन्हें साॅर्ट, डिलीट और आर्चिव कर सकते हैं।

  • मेल को डिलीट करने के लिए मेल पढ़ते समय डिलीट दबाएँ।
  • किसी मेल को आर्चिव करने के लिए उसे पढ़ते समय आर्चिव पर क्लिक करें।

जब किसी मेल को आर्चिव किया जाता है तो वह सिर्फ इनबाॅक्स से हट जाती है मगर डिलीट नहीं होती है। इसे देखने के लिए बाएँ पेन के मोर ड्राॅप-डाउन मेन्यू में ऑल मेल पर क्लिक करें।

  • एक बार मे एक से अधिक संदेशों को डिलीट या आर्चिव करने के लिए उन सभी के आगे सही का निशान लगाएँ (चैक ऑल पर क्लिक करके ) और फिर डिलीट या आर्चिव पर क्लिक करें।
  • किसी संदेश को ढूँढना।

पेज के सबसे ऊपर सर्च बाॅक्स में खोज के मापदंड जैसे भेजने वाले का नाम, दिनांक और विषय प्रविष्ट करें। खोज के नतीजे इनबाॅक्स में प्रदर्शित हो जाएँगे।

  • ई-मेल को साॅर्ट करना।

सेटिंग्स आइकन पर क्लिक करें।

इनबाॅक्स टैब पर क्लिक करें।

डिफाॅल्ट, इम्पोर्टेन्ट फर्स्ट, अनरैड फर्स्ट, आदि किसी भी विकल्प को चुनें। सेव चेंजेस पर क्लिक करें।

इनबाॅक्स में सोर्टेड ई-मेल की सूची प्रदर्शित होगी।

Attaching file with E-mail (ई-मेल द्वारा दस्तावेज भेजना)

अटैचमेंट सामान्यतः एक फाइल होती है जिसे मेल के साथ भेजा जाता है। किसी फाइल को अटैच करने के लिए निम्न क्रम अनुसरण करें:

  • कम्पोज विंडो के नीचे बने पेपर क्लिप आइकन पर क्लिक करें।
  • जिस फाइल को अटैच करना है उस फाइल को अपलोड डायलाॅग बाॅक्स में चुनें। अब ओपन पर क्लिक करें।
  • अटैचमेंट अपलोड होने लगेगी।
  • बाकी ई-मेल भी कम्पोज करें और सेंड पर क्लिक करें।

E-mail Signature (ई-मेल सिग्नेचर)

सिग्नेचर एक वैकल्पिक सूचना का समूह है जो हर ई-मेल के साथ भेजी जाती है। इसमें नाम, संपर्क सूचना, टाइटल, कम्पनी का एड्रेस या वेबसाइट जोड़ा जा सकता है।

  • पेज के दाएँ ओर दिए गये आइकन पर क्लिक करें और फिर सेटिंग्स पर क्लिक करें।
  • सिग्नेचर सेक्शन में सिग्नेचर टाइप करके सेव चेंजे़स पर क्लिक करें।

Social Netorking & e-Commerce (सोशल नेटवर्किंग और ई-काॅमर्स)

सोशल नेटवर्किंग दोस्तों, परिवार, सहकर्मियों, ग्राहकों, या ग्राहकों के साथ जुड़े रहने के लिए इंटरनेट-आधारित सोशल मीडिया साइटों का उपयोग है। सोशल नेटवर्किंग लोगों के बीच में फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और इंस्टाग्राम जैसी साइटों लोगों के माध्यम से एक सामाजिक उद्देश्य, एक व्यावसायिक उद्देश्य या दोनों हो सकते हैं। सोशल नेटवर्किंग ग्राहको को व्यस्त रखने के लिए विपणक के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बन गया है।

Important features of social networking (सोशल नेटवर्किंग की महत्वपूर्ण विशेषताएँ)

  • सोशल नेटवर्किंग कंपनियों के लिए विपणन के मजबूत अवसर प्रदान करता है, लेकिन पीआर आपदाओं के लिए उन्हें जोखिम में भी डाल सकता है।
  • 2019 की शुरूआत में सबसे लोकप्रिय सोशल नेटवर्क फेसबुक है।
  • मार्केटर्स ब्रांड की पहचान बढ़ाने और ब्रांड निष्ठा को प्रोत्साहित करने के लिए सोशल नेटवर्किंग का उपयोग करते हैं।
  • सोशल नेटवर्किंग लगातार विकसित हो रही है, इसलिए बदलावों को बनाए रखना चुनौती पूर्ण हो सकता है।

Types of Social Networking (सोशल नेटवर्किंग के प्रकार)

  • Facebook (फेसबुक)

फेसबुक इंटरनेट का सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला सोशल नेटवर्क है लगभग 1 1 मिलियन लोग इसका उपयोग पुराने दोस्तों के साथ जुड़ने और नए दोस्तों से मिलने के लिए करते हैं। इसका उद्देश्य मिशन लोगों को जोड़ने और उनके बीच संचार को सुविधाजनक बनाने के द्वारा दुनिया को “more open and connected” बनाना है।

लोग व्यक्तिगत प्रोफाइल बनाने के लिए फेसबुक का उपयोग करते हैं, अन्य उपयोगकर्ताओं को “फेसबुक मित्र” के रूप में जोड़ते हैं और असंख्य तरीकों से उनके साथ जानकारी साझा करते हैं। अधिकांश उपयोगकर्ता सभी प्रकार की सामग्री – फोटो, वीडियो, संगीत, चुटकुले और बहुत कुछ साझा करते हैं। वह समान विचार धारा वाले लोगों के साथ संवाद करने के लिए फेसबुक रूचि समूहों में शामिल होते हैं, जिन्हें वह अन्यथा नहीं जानते होंगे। ज्यादातर लेाग विशेष फेसबुक एप्लीकेशन का उपयोग करते हैं जो घटनाओं की योजना बनाने, गेम खेलने और अन्य गतिविधियों में संलग्न होने के लिए उपलब्ध हैं।

  • Twitter (ट्विटर)

प्रत्येक दिन सैकड़ो करोड़ उपयोगकर्ताओं और 500 मिलियन से अधिक ट्वीटर भेजे जाने के साथ व्यवसायों के लिए ट्विटर के माध्यम से नए और मौजूदा ग्राहको के वैश्विक दर्शकों तक पहुँचने का एक बड़ा अवसर है।

ट्विटर एक सामाजिक संचार उपकरण है जहाँ लोग छोटे संदेश प्रसारित करते हैं। यह संदेश, जिन्हें ट्वीट कहा जाता है, लंबाई में 140 वर्णो तक सीमित हैं। एक ट्विटर उपयोगकर्ता के रूप में, आप उन अन्य लोगों का चयन करतें हैं जिन्हें आप अनुसरण करना चाहते हैं, जब आप किसी का अनुसरण करते हैं, तो उनके ट्वीट आपको ट्विटर स्ट्रीम के रूप में जानी जाने वाली सूची में दिखाई देते हैं। जो कोई भी आपको चुनने के लिए चुनता है, वह आपके ट्वीट को उनकी स्ट्रीम में देखेगा आप समूह बनाने के लिए हैशटैग का उपयोग कर सकते हैं और किसी विशेष कीवर्ड या विषय के आसपास लोकप्रियता उत्पन्न करने में मदद कर सकते हैं। आपद किसी शहर, स्थानीय घटनाओं, समाचार कार्यक्रम, ब्रांड, खेल टीम, या किसी भी चीज के बारे में हैशटैग बना सकते हैं, जिसे आप हैश मार्क (# ) से पहले चाहते हैं। प्रत्यक्ष संदेश (डीएम) आपको अन्य ट्विटर उपयोगकर्ताओं के साथ निजी तौर पर संवाद करने देता है।

  • Linkedin (लिंक्डइन)

चाहे आप किसी बड़ी कंपनी में मार्केंटिंग एग्जीक्यूटिव हों,कोई बिजनेस ओनर जो एक छोटी सी स्थानीय दुकान चलाता हो या यहाँ तक कि काॅलेज में पढ़ने के बाद अपनी पहली नौकरी की तलाश में एक प्रथम वर्ष का काॅलेज स्टूडेंट हो, लिंक्डइन किसी के लिए भी है और हर कोई जो अपनी प्रोफेशनल लाइफ लेने में दिलचस्पी रखता है अपने करियर को विकसित करने और अन्य पेशेवरों के साथ जुड़ने के नए अवसरों की तलाश में अधिक गंभीरता से।

लिंक्डइन पर आपके नेटवर्क को “कनेक्शन,” के रूप में लोगों के साथ जोड़कर आप फेसबुक पर एक मित्र से अनुरोध करेंगे। आप निजी संदेश (या उपलब्ध संपर्क जानकरी ) के माध्यम से मना करते हैं और आपके पास अपने सभी पेशेवर अनुभव और उपलब्धियाँ हैं जो अन्य उपयोगकर्ताओं को दिखाने के लिए बड़े करीने से आयोजित प्रोफाइल में रखी गई हैं।

लिंक्डइन अपने लेटर और व्यापक सुविधा की पेशकश के मामले में फेसबुक के समान है। ये विशेषताएँ अधिक विशिष्ट हैं क्योंकि वे पेशेवरों को पूरा करते है। यह लेकिन सामान्य तौर पर, यदि आप जानते हैं कि फेसबुक या किसी अन्य समान सामाजिक नेटवर्क का उपयोग कैसे किया जाता है, तो लिंक्डइन कुछ हद तक तुलनीय है।

  • Instagram (इंस्टाग्राम)

फेसबुक या ट्विटर की तरह ही इंस्टग्राम अकाउंट बनाने वाले हर व्यक्ति का प्रोफाइल और न्यूज फीड होता हैं।

जब आप इंस्टग्राम पर कोई फोटो या वीडियो पोस्ट करते हैं, तो यह आपके प्रोफाइल पर प्रदर्शित हेागा। अन्य उपयोगकर्ता जो आपका अनुसरण करते हैं, वह आपके पोस्ट को अपनी फ़ीड मे देखेंगे। इसी तरह, आप उन अन्य उपयोगकर्ताओं के पोस्ट देखेंगे जिन्हें आप फ़ाॅलो करना चुनते है।

आप इंस्टाग्राम पर अन्य उपयोगकर्ताओं के साथ बातचीत करके उनका अनुसरण कर सकते हैं, उनके द्वारा अनुसरण किया जा सकता है, टिप्पणी, पसंद, टैगिंग और निजी संदेश भेज सकते हैं। यहाँ तक कि आप जो तस्वीरें देखते हैं, उन्हें इंस्टाग्राम पर सेव भी कर सकते हैं।

इंस्टाग्राम सभी उद्देश्य साझा करने के बारे में है, इसलिए हर किसी का मुख्य उद्देश्य केवल सर्वश्रेष्ठ फ़ोटो और वीडियो साझा करना और ढूँढना है।

  • Instant Messaging (इंस्टेंट मैसेजिंग)

एक इंस्टेंट मैसेज (IM) चैट के समान एक वास्तविक समय, टेक्स्ट-आधारित संचार है।  IM पर्सनल कंप्यूटर iPhones या अन्य उपकरणों का उपयोग करके दो या दो से आधिक लोगों के बीच एक साझा साॅफ्टवेयर क्लाइंट का उपयोग करता है। संचार एक नेटवर्क अर्थात् इंटरनेट पर किया जाता है और इसमें लाइव आवाज या वीडियो के साथ उन्नत मोड शामिल हो सकते हैं। फ़़ाइल स्थानांतरण की भी अनुमति होती है लेकिन सीमित आकार में। जब भी आपकी निजी सूची में कोई व्यक्ति ऑनलाइन होता है, तो यह आपको अलर्ट करता है फिर आप उस विशेष व्यक्ति के साथ एक चैट सत्र शुरू कर सकते हैं।

  • Whatsapp (व्हाट्सएप)

व्हाट्सएप मैसेंजर एक क्राॅस-प्लेटफाॅर्म इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लीकेशन है जो आईफोन, ब्लैकबेरी, एंड्राॅइड, विंडोज फोन और नोकिया स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं को मुफ्त में टेक्स्ट, इमेज, वीडियो और ऑडियो संदेशों का आदान-प्रदान करने की अनुमति देता है।

फेसबुक के स्वमित्व वाले एक फ्री, मल्टी-फंक्शन मैसेजिंग और वीओआईपी एप के रूप में, व्हाट्सएप सबसे लोकप्रिय काॅल और चैट एप में से एक है। व्हाट्सएप एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, मुफ्त इंटरनेट-आधारित अंतर्राष्ट्रीय काॅलिंग, क्राॅस-प्लेटाफाॅर्म संगतता, विस्तृत वैश्विक पहुँच और यहाँ तक कि डेस्कटाॅप संस्करण जैसी माँग वाली सेवाओं के साथ उपयोग में आसानी से जोड़ती है।

व्हाट्सएप विशेष रूप से अंतिम उपयोगकर्ताओं के साथ लोकप्रिय है जिनके पास असीमित पाठ संदेश नहीं है। बेसिक मैसेजिंग के अलावा, व्हाट्सएप ग्रुप चैट और लोकेशन शेयरिंग विकल्प प्रदान करता है।

तकनीकी रूप से, व्हाट्सएप खुले मानक एक्टेंसिबल मैसेजिंग और प्रेजेंस प्रोटोकाॅल (एक्सएमपीपी) के एक अनुकूलित संस्करण का उपयोग करता है। व्हाट्सएप् इंक की स्थापना 2009 में ब्रायन एक्टन और जान काॅउम (याहू के दोनों दिग्गज ) ने की थी।

  • Facebook Messenger (फेसबुक मैसेंजर)

फेसबुक मैसेंजर एक मोबइल टूल है जो उपयोगकर्ताओ को फेसबुक पर दोस्तों को तुरंत चैट संदेश भेजने की अनुमति देता है। उनके मोबाइल फोन पर संदेश प्राप्त होते हैं। फेसबुक मैसेंजर उपयोगकर्ताओं का उन लोगों को चैट संदेश भेजने में सक्षम बनाता है जो अपने फेसबुक अकाउंट पर लाॅग इन हैं। यह एंड्राॅइड फोन, आईफोन, आईपैड और ब्लैकबेरी डिवाइस के लिए उपलब्ध है। यह आईओएस, विंडोज (विंडोज 7 और विस्टा ) और एँड्राॅइड पर काम करता है।

फेसबुक मैसेंजर के साथ, उपयोगकर्ता अपनी वाॅल की पोस्ट देख सकते हैं और अपने फेसबुक दोस्तों से सूचनाओं पर टिप्पणी कर सकते हैं और नए संदेश आने पर सतर्क हो जाते हैं। एस आसान एप के बारे में बहुत अच्छी बात यह है कि इसमें गतिशील समूह वार्तलाप सुविधा है, जो मोबाइल उपकरणों के साथ एकीकृत है। एक स्थान-मानचित्रण उपकरण शामिल है। यूजर्स अपने दोस्तों को फोटो भी भेज सकते हैं। फेसबुक मैसेंजर के जरिए अब रियल-टाइम वीडियो शेयरिंग, वीडियो मैसेंजिंग और वाॅयस काॅल संभव है।

  • Telegram (टेलीग्राम)

टेलीग्राम मैसेंजर एक मैसेंजर एप है जो व्हाट्सएप या फेसबुक मैसेंजर की  तरह ही इंटरनेट पर काम करता है। इसका मतलब है कि आप वाई-फाई कनेक्शन या अपने मोबाइल डेटा (आपके पास पर्याप्त डेटा प्रदान करके) का उपयोग करके मुफ्त में संदेश भेज सकते हैं।

टेलीग्राम की मुख्य कार्य क्षमता अधिकांश अन्य मैसेजिंग एप्स की तरह ही होते हे-आप अन्य टेलीग्राम उपयोगकर्ताओं को संदेश दे सकते हैं, फाइलें और स्टिकर भेज सकते हैं।

टेलीग्राम का मुख्य विक्रय बिंदु सुरक्षा है। यह अपनी सभी गतिविधियों का दावा करता है- जिसमें चैट, समूह और मीडिया शामिल हैं – एन्क्रिप्टेड हैं, जिसका अर्थ है कि यदि वे इंटरसेप्टेड हैं, तो भी वह पहले डिक्रिप्ट किए बिना दिखाई नहीं देंगे।

टेलीग्राम का उपयोग स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटाॅप और डेस्कटाॅप कंप्यूटर पर किया जा सकता है। टेलीग्राम एप एंड्राॅइड, आईओएस, विंडोज फोन, विंडो एनटी मैकओएस और लिनक्स के लिए उपलब्ध है।

Introduction to Blogs (ब्लाॅग का परिचय)

एक ब्लाॅग एक प्रकार की वेबसाइट है जहाँ सामग्री को कालानुक्रमिक (जहाँ, नई सामग्री पहले दिखाई देती है) में प्रस्तुत किया जाता है। ब्लाॅग सामग्री को अक्सर प्रविष्टियों या “ब्लाॅग पोस्ट” के रूप में जाना जाता है।

ब्लाॅग आम तौर पर एक व्यक्ति या एक छोटे समूह द्वारा संवादी शैली में जानकारी प्रस्तुत करने के लिए चलाए जाते हैं। एक ब्लाॅग केवल व्यक्तिगत उपयोग के लिए मौजूद हो सकता है, एक विशेष समूह के साथ जानकारी साझा करने या जनता को संलग्न करने के लिए, ब्लाॅग स्वामी अपने ब्लाॅग को निजी या सार्वजनिक उपयोग के लिए सेट कर सकता है। जब कोई ब्लाॅग सार्वजनिक रूप से सुलभ हो जाता है, तो कोई भी व्यक्ति आमतौर पर ब्लाॅग स्वामी की व्यक्तिगत या व्यावसायिक वेबसाइट, उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल, ई-मेल और ई-न्यूजलेटर्स और ऑनलाइन कीवर्ड खोज इंजन पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से ब्लाॅग को खोज सकता है। आजकल बहुत सारे काॅरपोरेट ब्लाॅग हैं जो बहुत सारी सूचनात्मक सामग्री का उत्पादन करते हैं। ब्लाॅग आमतौर पर (लेकिन हमेश नहीं) एक व्यक्ति द्वारा लिखे गए होते हैं और नियमित रूप से अपडेट किए जाते हैं। ब्लाॅग अक्सर (लेकिन हमेशा नहीं) एक विशेष विषय पर लिखे जाते हैं- ऐ ब्लाॅग होते हैं, जो वस्तुतः किसी भी विषय पर आप सोच सकते हैं। फोटोग्राफी से लेकर आध्यात्मिकता तक, व्यंजनों से लेकर व्यक्तिगत डायरियों से लेकर शौंक तक-ब्लाॅगिंग में उतने ही अनुप्रयोग और किस्में हैं जितनी आप कल्पना कर सकते हैं। पूरे ब्लाॅग समुदायों ने इन विषयों में से कुछ के आसपास लोगों को एक-दूसरे के संपर्क में रखा है जहाँ वह सीख सकते हैं, विचारों को साझा कर सकते हैं, दोस्त बना सकते हैं और यहाँ तक कि दुनिया भर के समान हितों वाले लोगों के साथ व्यापर भी कर सकते हैं।

अक्सर लोग एक वेबसाइट के साथ ब्लाॅग को भ्रमित करते हैं। हालाँकि वेबसाइटें की प्रकृति में स्थिर होती हैं जहाँ सामग्री पृष्ठों में व्यवस्थित होती है, और वे अक्सर अपडेट नहीं की जाती हैं, जबकि एक ब्लाॅग गतिशील है, और यह आमतौर पर अधिक बार अद्यतन किया जाता है। कुछ ब्लाॅगर एक दिन में कई लेख प्रकाशित करते हैं।

Basics E- Commerce (ईकाॅमर्स की मूल बातें)

ई-काॅमर्स कोई भी व्यावसायिक लेनदेन है जो इंटरनेट पर इलेक्ट्राॅनिक रूप से किया जाता है। ई-काॅमर्स में अमेजन और ईबे जैसे मार्केट प्लेस, फेसबुक और पिंटरेस्ट जैसे सोशल मीडिया और बीच में सब कुछ शामिल है, जहाँ भी आप ऑन लाइन खरीदारी करते हैं।

अपना खुद का वेबस्टोर या वेबसाइट बनाते समय, आपको नीचे चर्चा किए गए क्षेत्रों से शुरू करना चाहिए। वे आपके व्यवस्या के लिए के एक अच्छी नींव बनाने में मदद करेंगे।

  • Choose your product and market (अपना उत्पाद और बाजार चुनें):

आपको यह जानना होगा कि आप क्या बेचना चाहते हैं और आप किसे बेचना चाहते हैं। कभी-कभी आपके अत्पाद को खरीदने के लिए लोग नहीं होते हैं।

  • Choose your platform (अपना प्लेटफ़ाॅर्म चुनें):

ऑननलाइन बेचने के लिए आपको ई-काॅमर्स प्लेटफ़ाॅर्म बनाने की आवश्यकता हो सकती है। यह एक ऐसा साॅफ्टवेयर है जिसका उपयोग आप वेबस्टोर बनाने और प्रबंधित करने के लिए करते हैं। मैगेंटो, वूकोमर्स और अधिक जैसे कई ओपन सोर्स प्लेटफ़ार्म हैं जो आपको अपनी जरूरतों के अनुसार स्वयं के वेबस्टोर को बनाने और अनुकूलित करने की अनुमति देते हैं। हालाँकि, आपको अपने वेबस्टोर को सेटअप करने के लिए कोडिंग ज्ञान की आवश्यकता होगी। Shopify Big Commerce, और Squarespace जैसे अन्य प्लेटफ़ाॅर्म हैं,जहाँ आपको अपनी वेबसाइट को कस्टम डिजाइन करने की जरूरत नहीं है, इसके बजाय आप पूर्व-निर्मित थीम से चुनते हैं।

  • Design and optimize website (वेबसाइट डिजाइन और आॅप्टिमाइज करें):

एक प्लेटफ़ाॅर्म चुनने के बाद अपनी वेबसाइट डिजाइन करें जो ग्राहकों को स्पष्ट रूप से बताए कि आप क्या बेच रहे हैं और इससे उन्हें क्या लाभ होगा। आपके उत्पाद को खरीदने के लिए आपकी वेबसाइट तक पहुँचने से लेकर यात्रा बहुत सरल होनी चाहिए अर्थात् आपकी वेबसाइट को अच्छी तरह से अनुकूलित किया जाना चाहिए। आपकी वेबसाइट पर काम करने वाले कुछ क्षेत्र हैं:

  • मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए उत्तरदायी डिजाइन
  • आसान उत्पाद खोज क्षमतायें
  • गुणवत्ता उत्पाद साम्रगी
  • आसान, तेज चेकआउट प्रक्रिया ग्राहक समीक्षा
  • Choose a payment solution (भुगतान समांधान चुनें):

ऑननलाइन बेचने के लिए आपको भुगतान एकत्र करने में सक्षम होना चाहिए। पेमेंट गेटवे जोड़ें ताकि आप ऑनलाइन पैसे जमा कर सकें।

  • Decide fulfilment methods (पूर्ति के तरीके तर करें):

एक ग्राहक द्वारा आपके उत्पाद को खरीदने के बाद आपको या तो सामग्री को पैक करना होगा और उसे अपने पते पर भेजना होगा या आप अपने ऑनलाइन आर्डर को स्टोर करने, लेने पैक करने और जहाज करने के लिए किसी तीसरे पक्ष की रसीद कंपनी को किराए पर ले सकते हैं।

  • Handling returns (रिटर्न को संभालना):

सभी ऑनलाइन विक्रेताओं को रिटर्न से निपटना होता है। यह ऑनलाइन बिक्री की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। 95% ऑनलाइन ग्राहक एक व्यापारी से फिर से खरीद करेंगे जो एक अच्छा रिटर्न या विनिमय अनुभव प्रदान करता है।

  • नई ई-काॅमर्स वेबसाइट शुरू करना आसान काम नहीं है। मूल बातें जानकर, आप एक सफल व्यवसाय के लिए एक ठोस आधार बना सकते हैं।

Types of e-Commerce models (ई-काॅमर्स माॅडलों के प्रकार)

  • Business to Business (B2B) ( बिजनेस टू बिजनेस)

यह बिजनेस टू बिजनेस ट्रांजैक्शन है जिसमें कंपनियाँ एक-दूसरे के साथ व्यापार करती हैं। इसमें अंतिम उपभोक्ता शामिल नहीं होता है। इसलिए, ऑनलाइन लेन-देन में केवल निर्माता, थोक व्यापारी, खुदरा विक्रेता आदि शामिल होते हैं।

  • Business to Customer (B2C) (बिजनेस टू कस्टमर)

यह बिजनेस टू कस्टमर ट्रांजैक्शन है जिसमें कम्पनियाँ अपने सामान और/या सेवाएँ सीधे उपभोक्ता को बेचती हैं। अपभोक्ता अपनी वेबसाइट ब्राउज कर सकते हैं और उत्पादों, चित्रो, समीक्षओं को देख सकते हैं। फिर वे अपना ऑर्डर देते हैं और कंपनी सीधे उन पर माल भेजती हैं। अमाजोन , फ्लिपकार्ट, जबाॅन्ग, आदि बी2सी के लोकप्रिय उदाहरण हैं।

  • Customer to Business (C2B) (कस्टमर टू बिजनेस)

यह बी2सी माॅडल का उल्टा है। इसलिए उपभोक्ता कंपनी को एक अच्छी या कुछ सेवा प्रदान करता हैं उदाहरण के लिए, एक आईटी फ्रीलांसर जो एक कंपनी में अपने साॅफ्टवेयर को डेमो और बेचता है। यह एक सी2बी लेनदेन होगा।

  • Customer to Customer (C2C) (कस्टमर टू कस्टमर)

इसमें ग्राहक से ग्राहक का लेनदेन होता है जहाँ उपभोक्ता एक दूसरे के सीधे संपर्क में होते हैं। इसमें किसी भी कंपनी की कोई भागीदारी नहीं होती है। यह लोगों को अपने निजी सामान जैसे कार, बाइक इलेक्ट्राॅनिक आइटम्स, आदि और संपत्ति को सीधे इच्छुक पार्टी को बेचने में मदद करता है। OLX, Quikr, आदि इस माॅडल का अनुसरण करते हैं।

  • 24 * 7 सेवा की उपलब्ध्ता – ई-काॅमर्स उद्यमों के व्यवसाय को स्वचालित करता है और जिस तरह से वह अपने ग्राहकों को सेवाएँ प्रदान करते हैं, यह कभी भी, कहीं भी उपलब्ध हो जाता है।
  • गैर-नकद भुगतान – ई-काॅमर्स क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, स्मार्ट कार्ड, बैंक की वेबसाइट के माध्यम से इलेक्ट्राॅनिक फंड ट्रांसफर और इलेक्ट्राॅनिक भूगतान के अन्य तरीकों का उपयोग करने में सक्षम बनाता है।
  • विज्ञापन/विपणन – ई-काॅमर्स व्यवसायों के उत्पादों और सेवाओं के विज्ञापन की पहुँच बढ़ाता है। उत्पादों/सेवाओं के बेहतर विपणन प्रबंधन में मदद करता है।
  • स्ंचार सुधार – ई-काॅमर्स ग्राहकों और भागीदारों के साथ तेज, कुशल, विश्वसनीय संचार के लिए तरीके प्रदान करता है।
  • बेहतर बिक्री – ई-काॅमर्स का उपयोग करके, किसी भी मानवीय हस्तक्षेप के बिना अत्पादों के लिए ऑर्डर्स किए जा सकते हैं। यह मौजूदा बिक्री संस्करणों को बड़ा बढ़ावा देता है।
  • इन्वेंटरी प्रबंधन – ई-काॅमर्स इन्वेंट्री प्रबंधन को स्वचालित करता है। आवश्यकता पड़ने पर रिपोर्ट तुरंत तैयार हो जाती है। प्रोडक्ट इन्वेंटरी प्रबंधन बहुत कुशल और बनाए रखने में आसान हो जाता है।
  • समर्थन – ई-काॅमर्स ग्राहकों को बेहतर सेवाएँ प्रदान करने के लिए पूर्व-बिक्री के बाद सहायाता प्रदान करने के लिए विभिन्न तरीके प्रदान करता है।

ई-काॅमर्स उदाहरण:

ई-काॅमर्स लेन -देंन के कुछ उदाहरण निम्नलिखित है-

  • एक व्यक्ति इंटरनेट पर एक किताब खरीदता है।
  • एक सरकारी कर्मचारी इंटरनेट पर एक होटल का कमरा बुक करता है।
  • एक व्यवसाय एक टोल फ्री नंबर पर काॅल करता है और विक्रेता के इंटरेक्टिव टेलीफोन सिस्टम का उपयोग करकें कंप्यूटर का आर्डर करता है।
  • एक व्यवसाय ऑनलाइन या इलेक्ट्राॅनिक नीलामी के माध्यम से कार्यालय की आपूर्ति खरीदता है।
  • एक रिटेलर एक ईडीआई नेटवर्क याएक सप्लायर के एक्स्ट्रानेट का उपयोग करके माल का आदेश देता है।
  • एक विनिर्माण संयंत्र कंपनी के इंट्रानेट का उपयोग करके कंपनी के भीतर दूसरे संयंत्र से इलेक्ट्राॅनिक घटकों का आर्डर देता है।
  • एक व्यक्ति एक स्वचालित टेलर मशीन (एटीएम) से धन निकालाता है।
  • Netiquettes ( नेटिकेट्स )

हर समाज में शिष्टाचार के कुछ नियम होते हैं जो उस समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए मान्य होते हैं। इसी प्रकार, जब हम ऑनलाइन रहकर संवाद करते हैं तो शिष्टाचार के कुछ नियमों का अनुसरण करना होता है। इन्ही नियमों का पालन जब हम नेट पर करतें है तो यह नेटिकेट्स कहलाते हैं।

जो लोग इन्टरनेट का प्रयोग करते हैं उन्हें नेटिजन कहतें हैं।

कुछ नेटिकेट्स इस प्रकार हैं:

  • असभ्य भाषा का प्रयोग न करें।
  • साफ और आसान भाषा का प्रयोग करें।
  • स्माइलीज प्रयोग करके अपने भाव व्यक्त करें।
  • साइबर दुनिया हमारी दुनिया की तरह है अतः यहाँ भी सोशल एटिकेट्स का पालन करें।
  • चोरी, बदमाशी, पीछा करना यह साइबर दूनिया में भी अपराध हैं।
  • सभी बड़े अक्षरों का प्रयोग चिल्लाना माना जाता है।
  • दूसरे लोगों की निजता का ध्यान रखें।
  • सार्वजनिक चैट रूम में, अपनी निजी सूचना साझा न करें और न ही किसी पर निजी टिप्पणी करें।
  • ई-मेल करते समय विषय और अटैचमेंट का साफ तौर पर उल्लेख करें। सिर्फ सही प्राप्तकर्ता को ही मेल भेजें।
  • अपने संदेश में सही व्याकरण और वर्तनी का प्रयोग करें ताकि आपको आसानी से समझा जा सकेे।
  • नागरिकों द्वारा उनके ऑफ़लाइन इंटरैक्शन में दी गई जानकारी का सम्मान किया जाना चाहिए।
  • वैध कार्रवाई से, उपभोक्ता आसानी से और जल्दी से समझ सकते हैं कि कैसे कंपनी उनकी जानकरी का उपयोग कर रही हे। और उन्हें किसी परेशानी या नुकसान से बचा रही है।
  • E-Governance (ई-गवर्नेंस)

ई-गवर्नेंस कुछ भी नहीं, लेकिन इंटरनेट प्रौद्योगिको का उपयोग सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक मंच के रूप में, सेवाएँ प्रदान करना और नागरिकों, व्यवसायों और सरकार के अन्य हथियारों के साथ लेन-देन करना है।

ई-गवर्नेंससामग्री शासन को मजबूत करने के लिए एक ठोस रणनीति प्रदान करता है। यह न केवल सरकारी प्रक्रियाओं की जवाबदेही, पारदर्शिता और दक्षता में सुधार कर सकता है बल्कि टिकाऊ और समावेशी विकास को भी आसान बना सकता है। बिना बिचैलियों की मध्यस्थता के, ई-गवर्नेंस दुरस्थ क्षेत्रों में समाज के सीमांत क्षेत्रों में सार्वजनिक सेवाओ के प्रत्यक्ष वितरण का एक तंत्र भी प्रदान करता है।

ई-गवर्नेंस राष्ट्रीय, राज्य, नगरपालिका और स्थानीय स्तर, नागरिक और व्यवसायों और सरकारी और सरकारी एजेंसियों के बीच सरकार के अंतर्गत सूचना और लेन-देन के आदान-प्रदान की दक्षता, प्रभावशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही को बदलने के लिए सूचना के उपयोग और उपयोग के माध्यम से नागरिकों को सशक्त बनाना भी इसका मुख्य कार्य है।

Types of e-Governance models (ई-गवर्नेंस माॅडलों के प्रकार)

इन माॅडलो को स्टेकहोल्डर्स, ई-गवर्नेंस सिस्टम डेवलपमेंट साइफल में शामिल किए गए कार्यात्मक चरणों का वर्गीकरण, इंफाॅर्मेशन फ्लो और नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान्स (NeGP) के अनुसार वर्गीकृत किया गया है। प्रत्येक माॅडल के अपने फायदे और सीमाएँ हैं।

  • Government to Business (G2B) (गवर्मेंट टू बिज़नस)

G2B माॅडल में सरकार द्वारा अनुमतियाँ, निगरानी, मूल्यांकन, करों का भुगतान, वस्तुओं और सेवाओं की खरीद आदि शामिल हैं। व्यवसायी समुदाय अपनी गतिविधियों को ऑनलाइन करना पसंद करता है जैसे कि अनुमति, रिटर्न, बिक्री, खरीद और इलेक्ट्राॅनिक माध्यमों से भर्ती। “विकासशील देश, जहाँ धन की कमी के कारण लागत को कम करने के लिए बहुत दबवा है, सरकारी एजेंसियों द्वारा G2B को प्रोत्साहित किया जा रहा है।”

  • Government to Citizen (G2C) (गवर्मेंट टू सिटिज़न)

G2C सरकार के साथ नागरिक संपर्क की सुविधा प्रदान करता है, जो ई-गवर्नेंस का प्राथमिक लक्ष्य है। यह लेन-देन करने का प्रयास करता है, जैसे कि सूचना खोजना, भूमि और संपत्ति के रिकाॅर्ड, और करों का भुगतान, लाइसेंस का नवीनीकरण, डोमेन लाभ के लिए आवेदान करना, आदि जो कम समय में क्रियान्वित करने में आसान हैं।

  • Government to employees (G2E) (गवर्मेंट टू एम्प्लाईज)

G2E माॅडल विशेष रूप से सरकारी इकाइयों, या तो राष्ट्रीय, राज्य या स्थानीय सरकार के लिए अंतर-विभागीय तात्कालिक संचार उपकरण है। जी टू ई माॅडल का उद्देश्य सार्वजनिक एजेंसियों के आंतरिक प्रदर्शन की दक्षता को बढ़ाना है।

  • Government to Government (G2G) (गवर्मेंट टू गवर्मेंट)

G2G में डेटा साझा करना और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच इलैक्ट्रोनिक आदान-प्रदान का संचालन करना शामिल है। इसका एक लाभ है- लागत बचत, जो लेन-देन की गति बढ़ाने, किसी कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यक कर्मियों की संख्या में कमी में कमी और परिणामों की स्थिरता में सुधार करके प्राप्त की जाती है।

Various Applications (विभिन्न अनुप्रयोग)

  • Railway Reservation (रेलवे रिजर्वेशन)

भारतीय रेलवे एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है जिसने आईटी के लाभों को प्राप्त करने के लिए ई-गवर्नेंस को सही तरीके से अपनाया है। भारतीय रेलवे ने आईआरसीटीसी को इस परियोजना के लिए साॅफ्टवेयर और बुनियादी ढाँचे की अवधारण, विकास और कार्यान्वयन का काम सौंपा।

लचीलेपन, मापनीयता, और पूरी तरह से स्वयं-सहायता व्यवस्था के प्रावधान (आरक्षण काउंटर पर सहायक प्रक्रिया से अलग) के मुद्दों पर इंटनेट उपयोगकर्ताओं को अनुमति दी जानी थी। इसके अलावा, लाखों उपयोगकर्ताओं को सुविधा के लिए विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन भुगतान तंत्र (जैसे क्रेडिट कार्ड,इंटरनेट बैंकिंग, कैश कार्ड आदि) को एकीकृत किया जाना था।

आईआरसीटीसी द्वारा 9 महीने से कम समय के रिकाॅर्ड समय के भीतर पूरे इंटरनेट टिकटिंग अवधारणा की कल्पना, निर्माण और कार्यान्वयन किया गया था।

  • Internet ticketing (इंटरनेट टिकटिंग)

IRCTC का इंटरनेट टिकटिंग ऑपरेशन 3 अगस्त, 2002 को CRIS, रेलवे सूचना प्रणाली केन्द्र के सहयोग से शुरू किया गया था। भारत में रेल यात्रा के लिए टिकट इंटरनेट पर तत्काल टिकट सहित वेबसाइट www.irctc.co.in पर किसी भी उपयोगकर्ता द्वारा साइट पर पंजीकरण करने के बाद (पंजीकरण मुफ्त है) बुक किए जा सकते हैं।

टिकटों के लिए भुगतान मास्टर/वीजा/डिनर क्लब/अमेरिकन एक्सप्र्रेस क्रेडिट कार्ड, सिटीबैंक डेबिट कार्ड और उपयोगकर्ताओं के बैंक खातों में डायरेक्ट डेबिट के माध्यम से किया जाता है। आई-टिकट 48/72 घंटे के भीतर भारत के 220 से अधिक शहारों में उपयोगकर्ताओं के घरों / कार्यालयों या उनकी पसंद के किसी अन्य पते पर पंहुचा दिया जाता है।

टिकटों की डिलीवरी के अलावा, IRCTC ग्राहकों की सहयाता के लिए 24 . घंटे की हेल्पलाइन जैसे कई मूल्यवर्धन भी करता है, ऑनलाइन उत्तर देने के लिए चौबीसों घंटे ईमेल, ट्रेन की टाइमिंग और अन्य विवरणों के लिए सुविधाएँ, उनके आवास के कन्फर्मेशन की स्थिीत के बारे में ग्राहकों को ई-मेल अलर्ट और किसी भी समय उनके टिकटों की डिलीवरी की स्थिति जानने के लिए एक ऑनलाइन कंसाइनमेंट टैªकिंब सिस्टम।

टिकट के साथ रद्द करने वाले काॅर्म को जमा करके देश भर के किसी भी कम्प्यूटरीकृत आरक्षण काउंटर पर आई-टिकट को रद्द किया जा सकता है। रद्दीकरण के समय ग्राहक को कोई नकद भुगतान नहीं किया जाता है। उपयोगकर्ता के क्रेडिट कार्ड खाते/बैंक खाते में राशि वापस जमा की जाती है।

  • e –Ticketing (ई-टिकट)

12 अगस्त, 2005 को, हमने ई-टिकटिंग सेवाएँ शुरू की थीं। उपयोगकर्ता

को उसके साथ भौतिक टिकट होना आवश्यक नहीं है (वह यात्रा के दौरान निर्दिष्ट प्रपत्र में इलेक्ट्राॅनिक आरक्षण पर्ची (ईआरएस) का प्रिंट आउट ले जा सकता है। यात्रा करते समय, उपयोगकर्ता को संबंधित सरकार द्वारा जारी फोटो पहचान पत्र के साथ ईआरएल ले जाना होता है, जो एक साथ यात्रा प्राधिकरण का गठन करता है।

इस सेवा का लाभ उठाने के लिए, उपयोगकर्ता www.irctc.co.in पर लाॅग इन कर सकता है। किसी सामान्य बुकिंग की तरह ही इंटरनेट पर अपने टिकट को बुक करें और प्लान माई टैªवल पेज में ’ई-टिकट’ का चयन करें। उपयोगकर्ता को टिकट बुक करते समय यात्रियों में से किसी एक का फोटो पहचान पत्र विवरण देना होगा। अपनी बुकिंग की पुष्टि होने पर, उपयोगकर्ता इलेक्ट्राॅनिक आरक्षण पचीं (ईआरएस) का प्रिंट ले सकता है और वह ईआरएस और फोटो पहचान पत्र के साथ यात्रा कर सकता है।

चार्ट तैयार करने तक वेबसाइट (www.irctc.co.in) पर ई-टिकट को रद्द करने की अनुमति है। काउंटर्स पर कैंसिल करना संभव नहीं है। आंािक/पूर्ण कैंसलेज्ञन ऑनलाइन संभव है, लेकिन अगर जिस यात्री की आईडी दर्ज की गई है, वह मूल रूप से अकेले अपनी यात्रा कैंसिल करना चाहता है, तो समूह के लिए पूरे टिकट को कैंसिल करना होग और नए सिरे बुकिंग करनी होगी।

यदि कोई व्यक्ति यात्रा के दौरान ईआरएस ले जाने में विफल रहता है तो 50/- बतौर फाइन लगाया जाता है। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति फोटो पहचान पत्र ले जाने में विफल रहता है, तो उसे बिना टिकट के माना जाता है। आईआरसीटीसी की ई-टिकटिंग परियाजना के माघ्यम से, नागरिकों (शहरी और ग्रामीण) को उनके घर/निवास पर ही रेल टिकट बुक करने और ’रेल आरक्षण केन्द्रों’ पर जाने की बाधाओं से बचने के लिए लाभ मिलता है।

  • Passport (पासपोर्ट)

वर्ष 2010 से पहले, जब भारत के नागरिक पासपोर्ट के लिए आवेदन कर रहे थे, उनमें से कई के पास प्रसंस्करण को पूरा करने के लिए लंबी धीमी गति से चलने वाली कतारों में घंटों खड़े रहने का अनुभव था।

पासपोर्ट कार्यालय में जाने के बाद, आवेदकों को संबंधित काम करने वाले हाथों के सामने और उदासीन व्यवहार को सहन करना पड़ता था।मैनुअल प्रोसेसिंग के कारण, पुलिस सत्यापन में भी बहुत समय लगता था और नागरिक के लिए पासपोर्ट वितरण का अंतिम चरण एक और नागरिक के लिए पासपोर्ट वितरण् क अंतिम चरण एक और दर्दनाक काम था। इस पूरे लंबे समय की की अवधि के दौरान, आवेदक को अपने स्वयं पासपोर्ट के ठिकाने को जानने के लिए एड़ी से चोटी का जोर लगाना पड़ता था। ऐसे भी उदाहरण हैं जब पासपोर्ट आवेदक के पास कई महीनों तक नहीं पहुँचता था। उच्च शिक्षा, चिकित्सा आधार, तीर्थयात्रा या किसी अन्य मानवीय आवश्यकता आदि पासपोर्ट के लिए आवेदन करने के उद्देश्य से सामान्य कारण हुआ करते थे।

  • Passport Seva Project (पासपोर्ट सेवा परियोजना)

Gov ने 18 मई, 2006 को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) लाॅन्च की, जिसमें 31 मिशन-मोड . प्रोजेक्ट (MNP) और पासपोर्ट सेवा परियोजना (PDP) शामिल थीं। PSP, NeGP की सबसे सफल परियोजना रही है। वर्ष 2008 में, विदेश मंत्रालय (MEA) ने देश की एक प्रमुख आईटी फर्म Tata Consultancy Services Limited (TCS) को PSP परियोजना प्रदान की, जिसे सार्वजनिक प्रतिस्पर्धी खरीद प्रक्रिया के माध्यम से चुना गया। इस परियोजना को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप ( पीपीपी) माॅडल के माध्यम से निष्पादित किया गया है; जिसमें पासपोर्ट देने के संप्रभु अधिनियम अभी भी भारत सरकार के अधीन है; TCS केवल एप्लीकेशन साॅफ्टवेयर के विकास के लिए जिम्मेदार है और PSP से संबंधित कार्यों को करने में सरकार की सहायाता करता है।

PSP को “समय पर, पारदर्शी, अधिक सुलभ, विश्वसनाीय तरीके से और सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं के माध्यम से एक आरामदायक वातावरण में नागारिकों को पासपोर्ट सेवा प्रदान करने और प्रशिक्षित और प्रेरित कार्यबल के लिए दृष्टि के साथ शुरू किया गया था।” इस परियोजना को क्रियान्वित करने के उद्देश्य से, एप्लीकेशन साॅफ्टवेयर के विकास के अलावा, TCS ने भारत भर में पासपोर्ट सेवा केन्द्र (PSK) के रूप में 81 कार्यालयों की स्थापना और प्रबंधन किया है, जोकि 37 RPO (क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों) के विस्तारित शाखाओं के रूप में हैं,जो हैं पासपोर्ट आवेदकों के लिए फ्रंट-एन्ड का काम करते हैं। PSK नागरिक केन्द्रित डिजाइन दर्शन की एक झलक यहाँ प्रस्तुत की गई है:

  • RSK आसानी से सुलभ, सुरक्षित वाणिज्यिक क्षेत्रों में स्थित हैं, जिनमें विश्व स्तर का माहौल, केन्द्रीय एयर कंडीशनिंग, और कई अन्य सर्वश्रेष्ठ-इन-क्लास सुविधाएँ हैं
  • वहाँ स्पिक-एन-स्पैन प्रोसेसिंग जोन, वेटिंग हाॅल, कैफेटेरिया, बेबी केयर रूम और वाॅशरूम हैं।
  • सार्वजनिक फोन, समाचार पत्र/पत्रिकाएँ, सूचना कियोस्क, फोटोकाॅपी मशीन जैसी सुविधाओं से लैस हैं
  • प्रसंस्करण काउंटर दुनिया में सर्वोत्तम एवं तुलनीय नवीनतम अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं जैसे- बेसिक कंप्यूटर हार्डवेयर और साॅफ्टवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा स्कैनर्स, वेब कैमरा, बायोमेट्रिक डिवाइस और नकली नोट डिटेक्टर डिवाइस आदि।
  • पीएसके लीडरशिप टीमें मैनेजमेंट प्रोटोटाइप का एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
  • TCS द्वारा प्रबंधित निजी कर्मचारी युवा, उत्साह से भरपूर और लगता है कि कार्यकुशलता और विनम्र व्यक्तित्व के लिए बने हैं।

इस प्रणाली में एक बड़ी चुनौती पासपोर्ट आवेदक के पुलिस सत्यापन में समय की खपत थी क्योंकि इस गतिविधि में आवेदक के निवास पर पुलिस का दौरा शामिल था। बढ़ती तकनीकी प्रगति के साथ, राज्य पुलिस विभागों ने पेपरलेस वर्किंग स्टाइल भी अपनाया है और पीएसपी ने एक कस्टम मोबाइल एप्लीकेशन mPassport पुलिस एप विकसित किया है, जिसका उपयोग पुलिस विभाग द्वारा अपने मोबाइल/टैब उपकरणों पर किया जाता है जब वह पते का सत्यापन के लिए फील्ड विजिट करते हैं। जिला पुलिस मुख्यालय के साथ मिलकर काम करना और उन्हें आवश्यक बुनियादी ढाँचे और प्रशिक्षण से लैस करना, पीएसपी ने पुलिस सत्यापन प्रक्रिया को तेज किया है और पुलिस सत्यापन में समय को काफी कम कर दिया है।

आवेदन प्रसंस्करण के बाद, अगले चरण यानी पासपोर्ट की छपाई भी पीएसपी का एक अनिवार्य हिस्सा है। RPO को एक साॅफ्टवेयर एप्लीकेशन और अपेक्षित हार्डवेयर के साथ सक्षम किया गया है ताकि प्रदान किए गए अनुप्रयोगों के लिए पासपोर्ट की सुचारू छपाई सुनिश्चित हो सके। प्रत्येक RPO अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अनुप्रयोगों के लिए, केन्द्रीय पासपोर्ट मुद्रण सुविधा (CPPF) है, जो सभी आवश्यक बुनियादी ढाँचे से समान रूप से सुसज्जित है।

’अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी’ को सक्षम करके, PSP ने भारत के नागरिकों को प्रसन्न करने के लिए परेशानी मुक्त सेवा प्रदान करके अथक परिश्रम किया है और गतिशील परिणाम प्राप्त किए हैं। इसने नागरिकों को पासपोर्ट संबंधी सेवाओं निष्पादित करने के तरीके को न केवल स्वचालित बल्कि पुनर्परिभाषित किया है।

  • e-Hospital (ई-अस्पताल)

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW), सार्वजनिक स्वास्थ्य वितरण सेवाओं में महत्वपूर्ण सुधार लाने के लिए “नागरिको तक सेवाएँ पहुँचने” और “सूचना प्रसार के माध्यम से नगारिक सशक्तिकरण” की दिशा में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की पहल eHealth या डिजिटल स्वास्थ्य को बढ़ावा दे रहा है। इस तरह की पहल का उद्देश्य है-

  • व्यापक पैमाने पर सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें,
  • टेलीमेडिसिन के माध्याम से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ प्रदान करने के लिए,
  • मौजूदा मानव संसाधनक कुशल और इष्टटमम उपयोग द्वारा स्वास्थ मानव संसाधन अंतराल को संबोधित करने के लिए,
  • मेडिकल रिकाॅर्ड की मदद द्वारा रोगी की सुरक्षा में सुधार करने और स्वास्थ्य देखभाल लागत को कम करनें में मदद करता है,
  • भौगोलिक रूप से फैलाए गए कार्यों और प्रभावी क्षेत्र स्तर की बातचीत के लिए प्रभावी एमआईएस की निगरानी करने के लिए,
  • साक्ष्य-आधारित योजना और निर्णय लेने में मदद करने के लिए,
  • प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में दक्षता में सुधार करना।

सरकार -से-नागरिक(G2C) , सरकार -से-व्यवसाय (G2B) और सरकार-से-सरकार (G2G) को कवर करने वाले चुनिंदा प्रमुख क्षेत्रों में IT- सक्षम सेवाओं/अनुप्रयोगों के क्रियान्वयन का कार्य भी मभ्मंसजी अनुभावो को सौंपा गया है। शासन के डोमने ताकि टेलिमेडिसिन के उपयोग सहित आंतरिक व्यापार प्रक्रियाओं की सेवा वितरण और प्रबंधन की दक्षता और प्रभावकारिता में सुधार हो सके। MoHFW ने भारत के सरकारी सेवा पोर्टल (https:://services.India.gov.in/) पर 40 स्वास्थ्य सेवाओं को भी एकीकृत किया है, जो विभिन्न भारतीय सरकारी संस्थओं द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं के लिए सिंगल विंडो एक्सेस को सक्षमक रने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी), इलेक्ट्राूनिक्स और सूचना प्रौद्योगिको मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है।

  • ORS (eHospoital)

जुलाई, 2015 में लाॅन्च किए गए सार्वजनिक अस्पतालों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली (ओआरएस) रोगी पंजीकरण और नियुक्ति प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने में सक्षम है और रोगियों के परिणामस्वरूप अब एडमिशनके लिए अस्पतालों में इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। वर्तमान में 120 से अधिक अस्पाल ओआरएस एप्लीकेशन का उपयोग कर रहे हैं, जिसमें से 80 से अधिक अस्पताल इस वर्ष बोर्ड में आए, जिसमें 7 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), अधिकांश केन्द्र सरकार के अस्पताल और कई राज्य सरकार के अस्पताल शामिल हैं।

ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली (ओआरएस) एक ऑनलाइन पोर्टल है जिसमें आधार कार्ड वाले नागरिक भारत के विभिन्न राज्यों और केन्द्र शसित प्रदेशों के अस्पतालों में नियुक्तियों के लिए नामांकन कर सकते हैं। इसे सेवा के माध्यम से, ओपीडी नियुक्ति, लैब रिपोर्ट और किसी भी सरकारी अस्पताल में रक्त की उपलब्धता प्राप्त करना ऑनलाइन और आसान हो गया है। सितंबर 2016 तक , 478 विभागों को कवर करने वाले 46 अस्पताल यह सेवा प्रदान करते हैं।

ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली (ओआरएस) अस्पतालों में लागू की जा रही है, जहाँ अस्पताल प्रबंध सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) के माध्यम से काउंटर आधरित रोगी विभाग (ओपीडी) पंजीकरण और नियुक्ति प्रणाली को डिजिटल कर दिया गया है।

पोर्टल विभिन्न अस्पतालों के विभिन्न विभागों के साथ ऑनलाइन एडमिशंस की सुविधा निम्नानुसार है-

  • आधार नंबर के ई-नो योर कस्टमर (eKYC) डेटा का उपयोग करना, अगर मरीज का मोबाइल नंबर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के साथ पंजीकृत है।
  • यदि यूआईडीएआई के पास मोबाइल नंबर पंजीकृत नहीं है, तो यह मरीज के नाम का उपयोग करता है।
  • नए पेशेंट को अपाॅइंटमेंट के साथ-साथ यूनीक हेल्थ आइडेंटिफिकेशन (UHID) नंबर भी मिलेगा। अगर आधार नंबर पहले से ही UHID नंबर से जुडा हुआ है, तो नियुक्ति नंबर दिया जाएग और UHID वही रहेगा
  • Features of ORS (ओआरएस की विशेषताएँ)

सरल नियुक्ति प्र िक्रया– अस्पताल में आपकी पहली विजिट के लिए, पंजीकरण,और डाॅक्टर के साथ नियुक्ति को सरल बनाया जाता है। आपको बस आधार नंबर, सेलेक्ट हाॅस्पिटल और डिपार्टमेंट, अपाॅइंटमेंट की सिलेक्ट डेट और अपाॅइंटमेंट के लिए एसएमएस का इस्तेमाल करके खुद को वेरिफाई करना होगा।

डैशबोर्ड रिपोर्ट – अस्पतालों की कुल संख्या जिनके लिए नियुक्ति उनके विभागों के साथ वेब के माध्यम से ली जा सकती है, जिसके लिए ऑनलाइन  नियुक्ति ली जा सकती है, रिपोर्ट में देखी जा सकती है। इस पोर्टल के माध्यम से नियुक्ति लेने वाले नए और पुराने रोगियों के बारे में जानकरी दिखाने वाली विस्तार रिपोर्ट देखी जा सकती है।

हॉस्पिटल ओन बोर्डिंग – अस्पताल इस प्लेटफ़ाॅर्म पर आ सकते हैं और रोगियों द्वारा ऑनलाइन बुकिंग के लिए अपनी नियुक्ति स्लाॅट प्रदान कर सकते हैं। प्रणाली अस्पतालों को आसानी से उनके पंजीकरण और नियुक्ति प्रक्रिया का प्रबंधन करने और उनकी निगरानी करने की सुविधा देती है।

Accessing e-Goverance Services on Mobile Using ‘UMANG APP’ (उमंग एप द्वारा मोबाइल पर ई-गवर्नेंस सर्विसेज को एक्सेस करना)

UMANGAPP

उमंग, जिसे यूनिफाइड मोबाइल एप्लीकेशन फाॅर न्यू-एज गवर्नेंस के रूप में भी जाना जाता है, देश में डिजिटल भुगतान लेनदेन को अपनाने के लिए और अधिक लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा शुरू किया गया एक ऑल -एन-इन एप है। उमंग एप एक एकीकृत एप्लीकेशन है जिसका उपयोग कई पैन इंडिया ई-सरकारी सेवाओं जैसे कि आयकर दाखिल करने आधार और भविष्य निधि सम्बंधित क्वेरीज, गैस सिलेंडर की बुकिंग, पासपोर्ट सेवा, आदि के लिए किया जा सकता है। यह मंच लोगों का राज्य और केन्द्र सरकार दोनों से 100 से अधिक सेवाओं तक पहुँच प्रदान करता है। उमंग के साथ, सरकार का उद्देश्य ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना और सरकार की डिजिटल इंडिया पहल के हिस्से के रूप में एक नई-शासन प्रणाली को अपनाना है। एप को एँड्राॅइड, आईओएस और विंडोज फोन पर मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है। उमंग को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) और इलेक्ट्राॅनिक्स और सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया है इस ई-गवर्नेंस एप्लीकेशन का उपयोग अन्य चैनलों जैसे कि वेब, एसएमएस या आईवीआर के माध्यम से भी किया जा सकता है।

एंड्राॅइड फोन पर उमंग एप डाउनलोड करने के लिए, Google Play Store पर जाएँ और उमंग टाइप करें। इंस्टाॅल पर क्लिक करें और एप डाउनलोड होने की प्रतीक्षा करें। सेवा के लिए ऐप पोस्ट डाउनलोड और पंजीकरण शुरू करने के लिए आगे बढ़े। । Apple उपयोगकर्ताओं के लिए, एप को एप्पल एप स्टोर से इंस्टाॅल किया जा सकता है।

Features and Benefits of Umang App (उमंग ऐप की विशेषताएँ और लाभ)

  • सहज एकीकरण – उमंग एप के साथ, उपभोक्ता कुछ नाम रखने के लिए आधार, डिजी लाॅकर, और PayGov सहित सभी सरकारी-संबंधित सेवाओं के साथ सहज एकीकरण का आनंद ले सकते हैं। आप यह भी देख सकते हैं कि पासपोर्ट केन्द्र स्थित हैं और अपाॅइंटमेंट बुक कर सकते हैं।
  • आसान पहुँच – यह ई-गवर्नेंस एप केवल स्मार्टफ़ोन तक सीमित नहीं है। आप इसे डेस्कटाॅप, टैबलेट या एसएमएस के माध्यम से भी उपयोग कर सकते हैं।
  • ग्राहक सेवा – उमंग की एक समर्पित ग्राहक सहायता टीम है जो एक उपयोगकर्ता के सभी मुद्दों को हल करती है। सपोर्ट टीम सप्ताह के सभी दिनों में सुबह 8 बजे से रात 8 तक उपलब्ध है।
  • सभी सेवाओं के लिए एकल एप – उमंग एप के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि यह 100 से अधिक सरकारी सेवाओं के लिए एकल मंच है उपयोगकर्ता विभिन्न चैनलों की एक श्रृंखला का उपयोग करके एकीकृत मंच पर कोई सेवाओं तक पहुँच प्राप्त कर सकेंगे।

Services available on UMANG app (UMANG एप पर उ पलब्ध सेवाएँ)

  • कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) सेवाएँ – उमंग एप उपयोगकर्ताओं को EPFO सेवाओं का उपयोग करने की अनुमति देता है। उपयोगकर्ता दावे करने और अपनी स्थिति ट्रैक करने में सक्षम होंगे।
  • एलपीजी सेवाएँ – उमंग एप का उपयोग ऑनलाइन सिलेंडर बुक करनें, रीफिल माॅगने, सब्सिडी, सरेंडर कनेक्शन, मैकेनिक सेवाओं के लिए पूछने आदि के लिए किया जा सकता है।
  • कर भुगतान – उमंग एप के बरे में सबसे अच्छी बात यह है कि यह उपयोगकर्ताओं को आयकर के भुगतान करने की भी अनुमति देता है।
  • पासपोर्ट सेवा – ग्राहक विभिन्न पासपोर्ट सेवा संबंधी सेवाओं जैसे कि एक केन्द्र का पता लगाने, शुल्क भुगतान की गणना करने, पासपोर्ट आवेदन की स्थिति पर नजर रखने और अपाॅइंटमेंट की उपलब्धता की जाँच करने के लिए उमंग एप का उपयोग कर सकते हैं।
  • पेंशन – सभी पेंशनभोगी पेंशन और पेंशनर्स कल्याण विभाग द्वारा दी जाने वाली सेवाओं का उपयोग कर सकतें हैं। पेंशन एप्लीकेशन प्रक्रिया, शिकायत और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों जैसी सभी सुविधाओं का लाभ एप पर पेंशन पोर्टल के माध्यम से लिया जा सकता है।
  • ePathshala– यह भारत सरकार और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (NCERT) की एक पहल है। छात्रों के पास ई-बुक्स, एजुकेशनल ऑडियो और वीडियो, पीरियोडिकल, लर्निंग आउटकम, करिकुलर रिसोर्सेस आदि होंगे।
  • CBSE – छात्र अपने परिणामों की जाँच करने और परीक्षा केन्द्रों का पता लगाने के लिए एस ई-गवर्नेंस एप का उपयोग कर सकते हैं।
  • e-Dhara Land Reeords – गुजरात के उपयोगकर्ता जिला तालुका और गाँवों के संबंध में उमंग एप का उपयेाग करके अपने भूमि रिकाॅर्ड की जाँच कर सकेंगे।
  • डिजी सेवा – एप उपयोगकर्ताओं को नौकरियों के लिए आवेदन करने और इ समंच का उपयोग करने के लिए ही उद्देश्य के लिए अपनी प्रोफाइल बनाने की भी अनुमति देता है। उपयोगकर्ता सरकारी संगठनों द्वारा पोस्ट किए गए सभी नौकरियों के लिए आवेदन कर सकते हैं।
  • फसल बीमा – सभी किसान इस उपकरण का उपयोग बीमा प्रीमियम और भारत सरकार द्वारा उन्हें उपलब्ध कराई गई विभिन्न योजनाओं के अनुसार उनकी उपज के लिए बीमित राशि की गणना करने के लिए कर सकते हैं।
  • फार्मा सही दाम – यह एप उपयोगकर्ता को दवाओं के लिए खोज उपकरण का उपयोग करके कीमतों के पता लगाने की अनुमति देता है।
  • ड्राइविंग लाइसेंस – वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्रों पर एक नज़र डालने और उसे डाउनलोड करने के लिए उपयोगकर्ता परिवाहन सेवा-सारथी और वाहन का भी उपयोग कर सकेंगे।

उमंग एप की अन्य सेवाएँ

  • मिनिस्ट्री ऑफ एग्रीकल्चर एँड फार्मर वेलफेयर गवर्नमेंट ऑफ इंडिया पर मार्केट प्राइस को देखना
  • GST/जी एस टी
  • ई-माइग्रेट विवरण को चेक करना
  • फार्म मशीनीकरण और विस्तार सुधार, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय
  • पेंशनरों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र
  • केन्द्रीय विद्यालय: एडमिशन, स्कूल की लोकेशन, परिणाम
  • एग्रो एडवाइजरी सेवाएँ
  • राष्ट्रीय छात्रवृत्ति: आवेदन की स्थिति और योग्यता परीक्षण
  • ऑनलाइन जाॅब आवेदन प्रणाली
  • परिवहन सेवा: सारथी और वाहन
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना
  • सोइल हेल्थ कार्ड
  • पेंशन पोर्टल
  • सुखद यात्रा

Digital Locker (डिजिटल लाॅकर)

पेपरलेस गवर्नेंस के विचार पर लक्षित, डिजीलाॅकर डिजिटल तरीके से डाक्यूमेंट्स और प्रमाणपत्र जारी करने और सत्यापन के लिए एक प्लेटफार्म है, इस प्रकार भौतिक डाॅक्यूमेंट के उपयोग को समाप्त करता है। डिजीलाॅकर खाते के लिए साइन अप करने वाले भारतीय नागरिकों को एक समर्पित क्लाउड स्टोरेज स्पेस मिलता है जो उनके आधार नंबर से जुड़ा होता है। वह संगठन जो डिजिटल लाॅकर के साथ पंजीकृत हैं, डाक्यूमेंट्स और प्रमाणपत्रों की इलेक्ट्राॅनिक प्रतियाँ (जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी, स्कूल प्रमाण पत्र) को सीधे नागरिकों के लाॅकर में स्टोर कर देती हैं।

इस प्लेटफार्म के निम्नलिखित लाभ है-

  • नागरिक अपने डिजिटल दस्तावेजों को कभी भी, कहीं भी और ऑनलाइन साझा कर सकतें हैं। यह सुविधाजनक और समय की बचत है।
  • यह कागज के उपयोग को कम करके सरकारी विभागों के प्रशासनिक कार्यभार को कम करता है।
  • डिजिटल लाॅकर दस्तावेजों की प्रामाणिकता को मान्य करना आसान बनाता है क्योंकि वे सीधे जारी किए गए जारीकर्ताओं द्वारा जारी किए जाते हैं।
  • स्व-अपलोड किए गए दस्तावेजों को डिजिटल रूप से मैपहद सुविधा का उपयोग करके हस्ताक्षरित किया जा सकता है (जो कि स्व-सत्यापन की प्रक्रिया के समान है)।

डिजी लाॅकर प्रणाली में प्रमुख हितधारक निम्नलिखित हैं-

  • जारीकर्ता- मानक प्रारूप में व्यक्तियों को ई-दस्तावेज जारी करने और उन्हें इलेक्ट्राॅनिक रूप से उपलब्ध कराने के लिए एक इकाई होती है। सीबीएसई, रजिस्ट्रार कार्यालय, आयकर विभाग, आदि आमतौर पर वे विभिन्न सरकारी विभाग होते हैं जो आपके विशिष्ट सरकारी विभाग से संबंधित दस्तावेज रखते हैं।
  • अनुरोधकर्ता – एक रिपाॅजिटरी (जैसे विश्वविद्यालय, पासपोर्ट कार्यालय, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय, आदि) के भीतर संग्रहीत एक विशेष ई-दस्तावेज के लिए सुऱिात पहुँच का अनुरोध करने वाला व्यक्ति यानी कोई भी सरकारी या निजी कंपनी आपसे विशिष्ट दस्तावेज तक पहुँच के लिए अनुरोध कर सकती है।
  • निवासी – एक व्यक्ति जो आधार संख्या के आधार पर डिजिटल लाॅकर सेवा का उपयोग करता है।

Key components of Digi locker (डिजी लाॅकर के प्रमुख घटक)

प्रत्येक निवासी के डिजीलाॅकर खाते में निम्नलिखित अनुभाग हैं-

  • डैशबोर्ड – यह अनुभाग वह पहला पृष्ट होता है जिसे आप लाॅगिन करते समय देखते हैं और अपने सभी दस्तावेजों का सारांश दिखाते हैं।
  • जारी किए गए दस्तावेज – यह अनुभाग आपको सरकार द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों या प्राणपत्रों के यूआरएल (लिंक) दिखाता है जैसे – डिजीलाॅकर में भाग लेने वाला विभाग या अन्य एजेंसियाँ।
  • अपलोड किए गए डाक्यूमेंट्स – यह अनुभाग उन सभी दस्तावेजों को दिखाता है जो आपके द्वारा अपलोड किए गए हैं। आप दस्तावेज़ प्रकार को अपडेट, ई-साइन, और साझा कर सकतें हैं।
  • साझा दस्तावेज़ – यह अनुभाग उन दस्तावेजों की सूची दिखाता है, जिन्हें आप दूसरों के साथ ई-मेल के माध्यम से साझा करते हैं।
  • गतिविधि – यह अनुभाग आपके डिजीलाॅकर खाते में आपके द्वारा की गई गतिविधियों का एक लाॅग है। लाॅग में फ़ाइल अपलोड, डाउनलोड, मैपहद आदि गतिविधियों के बारे में विवरण शामिल होता है।
  • इश्यूर्स – यह अनुभाग उन विभागों और एजेंसियों को सूचीबद्ध करता है जो डिजीलाॅकर पर पंजीकृत हैं। यदि इन विभागों ने आपको कोई दस्तावेज/प्रमाण पत्र जारी किया है, तो यह आपके जारी किए गए दस्तावेज़ अनुभाग में URL (लिंक) के रूप में दिखाई देगा।
  1. ई मेल का पूर्ण रूप बताइए ?
    • इलेक्ट्रॉनिक्स मेल
    • इलेक्ट्रॉनिक मेल
    • इलेक्ट्रो मेल
    • इलेक्ट्रिकल मेल
  2.  इ मेल यूजर नाम और डोमिन नाम किस विशेष चिन्ह के द्वारा अलग किया जाता है ?      
    • *
    • #
    • @
    • +   
  3. सरकारी संस्था का वेब डोमेन नाम क्या है ?
    • .com
    • .gov       
    • .edu
    • .org
  4. जब कोई सन्देश सफलता पूर्वक प्राप्त कर्ता ना पहुचे तो वह सन्देश कहा पर संग्रहित होता है ?
    • इन्बोक्स
    • सेंट
    • ट्रैश
    • आउट बोक्स
  5. इनमे से कोन सा सोशल नेटवर्किंग का सही उदाहरण नहीं है ?
    • जी मेल
    • फेसबुक
    • ट्वीटर 
    • उपरोक्त सभी
  6. 2019  की शुरुआत का सबसे लोकप्रिय सोशल नेटवर्क कोन सा है ?
    • इन्स्टाग्राम
    • ट्विटर
    • फेसबुक
    • इनमे से कोइकोई नहीं
  7. इन्टरनेट का सबसे अधिक उपयोग किये जाने वाला सोशल नेटवर्क कोन सा है ?
    • इन्स्टाग्राम
    • ट्विटर
    • फेसबुक
    • इनमे से कोई नहीं 
  8. एक ट्विटर हम अधिक से अधिक कितने वर्णों का प्रयोग कर सकते है ?
    • 200
    • 140
    • 240
    • 180
  9. whatsapp की  स्थापना कब हुई ?
    • 2009
    • 2008
    • 2010
    • 2006  
  10. whatsapp की स्थापना किसने की ?
    • John  milton
    • pascal
    •  Charly  Babbage
    • Brian Acton , Jan koum  
  11. इनमे से कौन से ई- कोमर्स के सही उदाहरण है ?
    • फेसबुक
    • अमेज़न
    • दोनों a तथा b
    • इनमे से कोई नहीं
  12. ई – कोमर्स मोडल के कितने  प्रकार होते है ?
    • 3
    • 4
    • 5
    • 2
  13. B2C क पूर्ण रूप बताइये ?
    • Business to customer
    • Business to consultancy
    • Business to confectinnery
    • इनमे से कोई नहीं
  14. ई – गवर्नेस मोडल कितने प्रकार के होते है ?
    • 4
    • 2
    • 3
    • 5
  15. G2E का पूरा नाम बताइये ?
    • Government  to Government
    • Government  to Employee
    • Government to Entire
    • None
  16. भारतीय रेलवे नेटवर्क दुनिया में कौन से नंबर में आता है है ?
    • पहला
    • दूसरा
    • तीसरा
    • चोथा
  17. ई – टिकटिंग सेवा कब शुरू की गई ?
    • 2004
    • 2006
    • 2003
    • 2005
  18. NGP का पूर्ण रूप बताइये ?
    • राष्ट्रीय ई – गर्वनेस  योजना
    • राष्ट्रीय  ई – मेल प्रोजेक्ट
    • राष्ट्रीय ई – गवर्नमेंट  प्रोजेक्ट
    • इनमे से कोई नहीं
  19. NeGP कब लोंच की गई ?
    • 2004
    • 2005
    • 2006
    • 2007 
  20. MOHFW का पूर्ण रूप बताये ?
    • स्वास्थ्य परिवार कल्याण
    • मुख्य स्वास्थ्य
    • मुख्य परिवार कल्याण सेवायें
    • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
hsgurujihttp://hsguruji.com
I am a life coach,motivational trainer and a computer master.
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